दिल्ली हाईकोर्ट ने WhatsApp private policy लेकर कहा- कंपनी के जवाब को ऑन रिकॉर्ड रखे सरकार
नई दिल्ली
भारत में WhatsApp private policy को लेकर बवाल मचा हुआ है और अभी ये मामला दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा हुआ है। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस और प्रश्नावली पर वो व्हाट्सएप के स्पष्टीकरण को ऑन रिकॉर्ड रखें। सुनवाई के दौरान केंद्र की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि व्हॉट्सऐप यूरोप और भारत के यूज़र्स के साथ अलग-अलग रवैया अपना रहा है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने व्हाट्सएप की प्रतिक्रिया के लिए समय मांगा, जिसके बाद जस्टिस संजीव सचदेवा ने मामले की सुनवाई को 1 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया। सुनवाई के दौरान, एएसजी ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार व्हाट्सएप की इस नई नीति पर कड़ा जोर दे रही है कि कंपनीभारतीय यूजर्स के भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप को नोटिस और प्रश्नावली भेजे गए हैं, जो किसी व्यक्ति की गोपनीयता से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर उसकी प्रतिक्रिया मांग रहे हैं।
एएसजी ने अदालत को यह भी बताया कि फेसबुक के साथ डेटा साझा नहीं करने का एक ऑप्ट-आउट विकल्प व्हाट्सएप के यूरोपीय उपयोगकर्ताओं को दिया गया है, लेकिन यह भारतीय उपयोगकर्ताओं को "सभी या कुछ नहीं दृष्टिकोण" के साथ विचार करते हुए नहीं दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि एक संयुक्त संसदीय समिति पहले ही व्यक्तिगत डेटा संग्रह विधेयक पर चर्चा कर रही है। "व्हाट्सएप द्वारा अपने यूरोपीय उपयोगकर्ताओं को दी जाने वाली गोपनीयता नीति विशेष रूप से फेसबुक कंपनी के साथ साझा की गई किसी भी जानकारी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाती है.... यह खंड भारतीय यूजर्स के लिए पेश नहीं किया गया है।" उन्होंने कहा कि दोनों देशों के यूजर्स के लिए ये बड़ा अंतर सरकार के लिए भी चिंता है। केंद्र ने कोर्ट को बताया, "यह स्पष्ट रूप से दो निजी पार्टियों के बीच है, लेकिन व्हाट्सएप का दायरा और विस्तार इसे एक जर्मन ग्राउंड बनाता है, जिसमें उचित और तल्ख नीतियां बनाई जाती हैं।"
अदालत एक वकील चैतन्य रोहिल्ला द्वारा व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कहा गया था कि यह नागरिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन करती है। व्हाट्सएप के लिए अपील करते हुए, वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि सरकार ने उन्हें नई गोपनीयता नीति पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए लिखा है। उन्होंने कहा कि वे आज तक सरकार को अपनी प्रतिक्रिया देंगे । याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनोहर लाल ने अदालत को बताया कि नीति कंपनी के कानूनों के संदर्भ में नहीं है। उन्होंने कहा कि डेटा का बंटवारा देश की सुरक्षा और लोकतंत्र के लिए खतरे का एक गंभीर मामला है क्योंकि सूचना विश्व स्तर पर साझा की जा सकती है।

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